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times readगर प्यार हुआ तुम्हें मेरी तरह
जुदाई के दिन मर-मरके काटूँ
भली बात करता है वो बुरी तरह
फ़िराक़1 में बेचैनी न विसाल2 में सुकूँ
आराम नहीं इस दिल को किसी तरह
ग़ालियाँ देते हो तुम कितने प्यार से
बात तो हो तुमसे चाहे इसी तरह
तबाह हूँ तो चर्ख़3 की मरज़ी से हूँ
क़हर बरपे हैं हमपे कई तरह
आशिक़ों ने सहें हैं सितम माशूक़ के
मगर कौन था जाँ-बलब4 मेरी तरह
शब्दार्थ:
1. बिछोह, separation, 2. मिलन, intimacy, 3. आसमान,ईश्वर, Sky, God, 4. जिसके होंटो पर जान हो
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लेखन वर्ष: २००४



















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