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चाँद, बादल और शाम
तख़लीक़-ए-नज़र

जी मेरा सीने में कुछ सिमटता है

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जी मेरा सीने में कुछ सिमटता है
एक नया सवाल-सा उठता है

हमें ख़ुद रंज आप-से आता है
क्यों सुकूँ दम-ब-दम घटता है

रात नींद नहीं आती देर तक
नब्ज़-नब्ज़ लम्हा कटता है

किताबों में लिखते हैं तेरा नाम जो
वो कब मिटाये से मिटता है

तुझे निकालना चाहता हूँ दिल से
तो दिल से दिल और सटता है

इश्क़ से तो नहीं हूँ मैं वाक़िफ़
दिल को शोला-सा कुछ लिपटता है*

*यह शे’र मिर्ज़ा रफ़ी ‘सौदा’ का है

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लेखन वर्ष: २००४
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तख़लीक़-ए-नज़र | गुलाबी कोंपलें

32 टिप्पणियाँ

जबरदस्त!! बहुत उम्दा!


लाजवाब शेर हैं भाई विनय नज़र जी!
बहुत बधाई!


बहुत प्यार करते है जो उनका यही हाल होता है,
बढ़िया लिखा आपने..प्रेम की सुंदर अभिव्यक्ति...बधाई


इश्क से तो नही हूँ मै वकिफ
दिल को शोला-सा कुछ लिपटता है,

सौदा जी को पढवाने के लिये शुक्रिया.......बेहद खुबसूरत नज़्म


bahut sundar sair padwaaii aapny, sukriya vinay ji and a very good morng.


बहुत ही जवर्दस्त भाई हर शॆर कबिलेतारीफ़ है
आप का न्यवाद


khub likhte hai nazar sahab,bahut khub likhte hai...be-hisaab dard bhara hai aapke jee mein.


KITAABON MEIN LIKHTE HAIN TERA NAAM JO ......

LAJAWAB GAZAL KA UMDA SHER ...... KAMAAL KE HAIN SAB SHER ...... SUKOON PANHUCHAATE HUVE ... SHUKRIYA VINAY JI .......


इस जज्बे को ही शायद प्यार कहते हैं।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }


बहुत खूबसूरत ग़ज़ल...वाह !


बहुत उम्दा !!


जब बाँट लोगे गम तो नही सिमटेंगे... ..!


ये इश्क नहीं आसां, बस इतना ही समझ लीजे...एक आग का दरिया है...और डूब के जाना है...।


बहुत खूब।


Badhiya gazal. Aur mirja rafi sauda ka sher to sone par suhaga.


काबिले तारीफ गज़ल है बधाई


बहुत अच्छे नज़र जी
एक अरसे बाद आपके दरबार में हाजरी लगाई है....... पढ़कर अच्छा लगा...


बहुत ही ख़ूबसूरत, शानदार और लाजवाब ग़ज़ल है! इस बेहतरीन और उम्दा ग़ज़ल के लिए ढेर सारी बधाइयाँ!


सौदा की ज़मीन पर लिख रहे हैं आप ! क्या बात है ! -शरद कोकास


bahut achchhe ,,,,,ye umr me ishq hona lazami hai ...


बहुत ही खूबसूरत नज्म है।


उम्दा ग़ज़ल....बहुत बहुत बधाई...


क्या खूब गज़ल है बधाई


"तुझे निकालना चाहता हूँ दिल से तो दिल सेदिल और सटता है ! "
बहुत सुन्दर ! अच्छा लगा !


और विनय भईया ! क्या हाल चाल है !


thanks for sharing this.

-Sheena


fir, apani aadataanusaar, padhhta rahaa par comment nahi de paayaa...
saval naye se uthate hue..shandar gazal



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