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times readदिल का रिश्ता है तेरे-मेरे बीच
तंगिए-दिल से पहलू को छुटाओ
गरज़ को न लाओ तेरे-मेरे बीच
लख़्ते-दिल आँखों से रिसते हैं
ये फ़ासला क्यों है तेरे-मेरे बीच
किसी ग़ैर के कहे पे मत जाना तुम
हैं आज ग़ैर क्यों तेरे-मेरे बीच
जलता है मेरा कलेजा तुम बिन
इक अफ़साना है तेरे-मेरे बीच
ख़ुदा जाने मेरा दर्दे-दिल
जो आग है बुझा दो तेरे-मेरे बीच
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लेखन वर्ष: २००४



















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