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times readबहाये इतने आँसू कि जहाँ खड़े थे वहीं धँस गये
न जिगर से लहू बहा न लब तक अपनी बात आयी
गिरियाँ2 दिल ही में बादल बने वहीं बरस गये
रह-रहके रूह छोड़ना चाहती थी इस ज़ोफ़3 बदन को
इतना चाहते हैं तुम्हें कि मरने तक को तरस गये
कोई पढ़ दे मेरा नसीब हमको क्या-क्या बदा4 है
हमें लगता है हम जहाँ-जहाँ भी गये अबस5 गये
किस तरह से भूलें तुमको किस तरह से भुलायें
दिल, जान, ख़्याल और तस्व्वुर6 में तुम बस गये
दिल लिया तुमने ग़म नहीं बारहा7 जान क्यों लेते हो
फिर गुज़रे सामने से और फिर मुझपे हँस गये
शब्दार्थ:
1. धर्मोपदेशक, 2. आँसू, 3. कमज़ोर, 4. निश्चित, 5. व्यर्थ, 6. याद, 7. बार-बार



















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