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चाँद, बादल और शाम
तख़लीक़-ए-नज़र

वो हमसे' हम उनसे रूठते हैं बेवज़ह

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मेरा दिल पत्थर था तुझ पर दीवाना हुआ
दीवानगी में लग के ख़ुद से अंजाना हुआ

तेरी सूरत में जो देखा न देखा था आज तक
लाले पड़े जान के ईमान का भी जुर्माना हुआ

हाए किस अदा के साथ देखा तुमने मुझे
बिस्मिल1 तेरा तीरे-नज़र का निशाना हुआ

मैंने तुम्हें देखा तुम मुझे देखकर मुस्कुराये
बस इसलिए मशहूर यह अफ़साना हुआ

भड़कीं दोनों जानिब इश्क़ की चिंगारियाँ
ख़ुतूत2 के ज़रिए अब इश्क़ फ़रमाना हुआ

वो हम से' हम उन से रूठते हैं बेवज़ह
अब रोज़ उनसे अपना रूठाना मनाना हुआ

शराब की तरह होता है यह इश्क़ भी
बढ़िया उतना ही हुआ जितना कि पुराना हुआ

दर-ब-दर भटकता था किस जुस्त-जू3 में
कैसा मक़ाम है यह तेरे दिल में ठिकाना हुआ

जल रहा है शबो-रोज़ एक आरज़ू लिए
तेरे दिल की शमा पे मेरा दिल परवाना हुआ

तौबा की थी इक रोज़ मोहब्बत से मगर
तेरी लगन में मेरा यह दिल आशिक़ाना हुआ

बेतरह बेमक़सद जी रहा था मैं ज़िन्दगी
ख़ुश हूँ आज चलो मरने का तो बहाना हुआ

और ज़िन्दगी में क्या कीजिए महज़ इश्क़
इसलिए तुमसे अपने दिल का लगाना हुआ

बेवफ़ा नहीं हूँ और न ही करता हूँ झूठे वादे
इक बार किया वादा मर के भी निभाना हुआ

तुमने चुरा लिया मेरा दिल सबके सामने
अबकि बार मुझको तेरा चैन चुराना हुआ

अब दिल के सभी दाग़ दिखा देंगे हम तुमको
कि तेरी पैमानाए-निगाह को छलकाना हुआ

बड़े ढीठ हो कि सुनते नहीं मेरा हाले-दिल
कि तेरा हाथ पकड़ के मुझको तो सुनाना हुआ

अजनबी हो आज मगर होगे आश्ना भी
किसी तरह तो मुझे तेरा दिल धड़काना हुआ

शब्दार्थ:
बिस्मिल: घायल ; ख़ुतूत: एक से ज़्यादा ख़त ; जुस्त-जू: तलाश।

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लेखन वर्ष: २००४
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30 टिप्पणियाँ

शराब की तरह होता है ये इश्क
उतना बदिया जितना पुराना हुआ
बहुत ही बदिया है लाज्वाब गज़ल्


वाह...बड़ी रोमांटिक ग़ज़ल लिखी है आपने...लिखते रहिये...
नीरज


बहुत सुन्दर हर शेर अच्छा लगा


shandaar gazal.har sher bahut badhiya.


खूबसूरत ग़ज़ल ..........नए से हैं सारे शेर कमाल के शेर


GUFTAGU UNSE ROJ HOTI HAI ..MUDDATON SAAMANAA NAHI HOTAA.... AAP TO EED KE CHAND HO GAYE HAI JANAAB.. MAGAR KHUB SHE'R PADHEE AAPNE.. BADHAAYEE


ARSH


बहुत सुन्दर रचना है।बधाई।


wah, vinay,

sharaab ki tarah............... jitna purana hua.

bahut khoon , maza aa gaya bhai. bahut badhai.


रूठने की कुछ तो वजह रही होगी।
ये अलग बात है कि मुझको समझ नही आई।


रूठने की कुछ तो वजह रही होगी।
ये अलग बात है कि मुझको समझ नही आई।


vinay ji bahut khoobsurat gazal hai tumhari gazal padh kar mai bhi urdu seekh jaaoongi bahut bahit dhanyvad


sharaab ki tarah hota hai ye ishq bhi,badhiya aur h jitna purana huaa....naayab khyaalaat janaab...likhte rahiye un hi...

mere blog pe ek naatak aapki pratikriyaa ka intezaar kar rahi hai :)


आप सभी महानुभावों का शुक्रिया


... बेहद खूबसूरत गजल ... हरेक शेर अपने आप मे सबाशेर है ... प्रभावशाली व प्रसंशनीय अभिव्यक्ति !!!!!


आपकी ग़ज़ल भी शराब की तरह लगी....मदहोश कर दिया.....तो फ़िर जितनी पुरानी उतनी बढ़िया वाली बात भी सच ही है, लेखन वर्ष २००४ के हिसाब से.....

साभार
हमसफ़र यादों का.......


विनय जी

आप जो भी लिखते है वह बहुत शानदार होता है.........बधाई......शब्दो और भावनाओ का तालमेल नायाब होता है.


विनय जी,

इश्‍क बड़ी गहराईयों से समझा है, इब्तिदा से अंजाम तक सब कसा हुआ है। पूरी प्रोसेस नज़र आ जाती है इश्‍क गज़ल के साथ आगे बढ़ते हुये।

अच्छी रचना है।

मुकेश कुमार तिवारी


श्याम जी, मुकेश जी, ओम जी और वो यादें के ब्लॉग संचालक का तहे-दिल से धन्यवाद व्यक्त करता हूँ


आपकी टिपण्णी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया!
बहुत ही ख़ूबसूरत और दिल को छू लेने वाली रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ है!


यूँ ही रूठना मनाना चलता रहना चाहिए।
पर आदमी को फोन भी उठाना चाहिए।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }


शराब की तरह होता है यह इश्क भी
बढ़िया उतना ही हुआ जितना कि पुराना हुआ .
वाह भाई विनय जी आपके ब्लॉग पर आकर तो सचमुच लगता है कि बस पढ़ती ही रहूँ और कुछ भी न लिखूं आप बढ़िया ग़ज़ल कहते है बधाई


bahut lajvab gazal hai bahut bahut badhai


Good noon Vinay ji,

Bahut sundar likha hain aapny, mera net kharab tha isliye aap ke sunder rachna ko pad nahi paai, aaj fir padny ko mila bahut sukun mila mujhy.

Manju"Mahiraj"


अपने सभी सुधी पाठकों का बहुत-बहुत शुक्रिया


Bahut khoobsurat gazal. har line dusari se behtar hai ki kisi ek ko achcha kahna dusare ke prati nainsaafi kahlayega. aise hi likhte rahiye aur shbad sansar me chamkate rahiye


its a wonderful gazal, blog is just superb...


रजत और सुरभि जी आपका हार्दिक स्वागत है


अच्छी अभिव्यक्ति


ishq ko ek aur behtareen nazraana aapki is gazal ke zariye..



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