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चाँद, बादल और शाम
तख़लीक़-ए-नज़र

ख़ुदाया कभी करम मुझ पर भी

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ख़ुदाया1 कभी करम मुझ पर भी
सुम्बुल2 की थोड़ी मेहर इधर भी

प्यार क्या है नहीं जानता मैं
मगर सिखा दे मुझे ये हुनर भी

तेरा ख़ाब सजाया मैंने आँखों में
ख़ाब है चाँद है और सहर3 भी

इश्क़ की आग जो इस दिल में है
एक अक़्स4 है इसका उधर भी

मोहब्बत का दावा किया जो आज
मैं करूँगा रोज़े-महशर5 भी

मेरी जान भी ले लो अगर चाहिए
मगर लेना मेरी कुछ ख़बर भी

शब्दार्थ:
1. ऐ ख़ुदा 2. सुम्बुल(प्रेयसी), 3. भोर, 4.परावर्तन(Reflection), 5. निर्णय का दिन(Judgment day)
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तख़लीक़-ए-नज़र | गुलाबी कोंपलें

36 टिप्पणियाँ

बेहद सुन्दर गजल है !!!!!


गयी शाम है अब सहर हो चली है,
अभी मन के कस्बे की सूनी गली है।
छिपे हो कहाँ इक झलक तो दिखाओ,
खुदा! उनको इक बार मुझसे मिलाओ।


प्यार क्या है नहीं जनता मै....
मगर सिखा दे मुझे ये हुनर भी...

" मासूम और कोमल अल्फाज खुबसुरत.."

Regards


Tera khwab sajaya maine aankho me,
Khwab hai chand hai aur sahar bhi......

Simply Super......!!


प्‍यार क्‍या है नहीं जानता,

पर सिखा से मुझे ये हुनर भी।



तेरा ख्‍वाब सजाया मैंने आंखों में

खाब है चांद है और सहर भी।

बहुत प्‍यारे शेर कहे हैं, बधाई।


Achchi Fazal. Aakhri do She'r bahut achche hain.Too good.
Tera khaab sajaya aankhon mein ... yeh bhi achcha laga.

Mash-har ya Mah-shar? Kindly check ...

God bless
RC


JANAAB AAKHIRI SHE'R KE KYA KAHANE BAHOT HI UMDA LIKHA HAI AAPNE BAHOT BADHAEE AAPKO.. EK BEHATARIN GAZAL KE LIYE...


ARSH


सभी का तहे-दिल से धन्यवाद! RC जी का बहुत-बहुत धन्यवाद कि उन्होंने सही बात की ओर ध्यान इंगित किया!


खूबसूरत...........क्या बात है विनय जी

बेहतरीन, लाजवाब


सहर का अर्थ दिन न लिख कर भोर लिखा अच्छा लगा /ब्रह्म मुहूर्त का स्वप्न ,चाँद भी ,सहर भी /अच्छी रचना


ख़ुदाया1 कभी करम मुझ पर भी
सुम्बुल2 की थोड़ी मेहर इधर भी
प्यार क्या है नहीं जानता मैं
मगर सिखा दे मुझे ये हुनर भी
बहुत ही सुंदर लगी आप की यह गजल ओर गजल का हर शॆर.
धन्यवाद


Nuktacheeni alagg cheez hai aur feedback alagh. Nuktacheeni na hi karein to achcha! Lekin agar apne Poet-dost ki Poetry ko behtar karne ki sachchi khwaahish ho, toh kuchh bhi bura nahin lagega ! Sirf tareef karna apni jagah hai aur postives-negatives per raay dena apni jagah!
Aage aapki marzi!

God bless
RC


दिल चाहता है कि मैं बनू आपका हमसफ़र भी.


मेरी जान भी ले लो अगर चाहिए
मगर लेना मेरी कुछ खबर भी.

-सुंदर.


मेरा आपसे एक ही अनुरोध है कि कृपया साइंस ब्लॉग पर आज २६-३-०९ को मेरे द्वारा किया गया निवेदन पढने की कृपा करें


आप सभी के स्नेह एवं प्यार का मैं बहुत-बहुत ऋणी हूँ, धन्यवाद!


bahut hi najuk prastuti..........thanks alot


डियर, मैटर पढने में दिक्‍कत होती है। फांट कलर थोडा ब्राइट करें।

----------
तस्‍लीम
साइंस ब्‍लॉगर्स असोसिएशन


बेहतरीन भावाभिव्यक्ति के लिये बधाई स्वीकारें


आप सभी का मैं बहुत शुक्रगुज़ार हूँ कि आपको मेरा लिखा पसंद आ रहा है और आप सभी का धन्यवाद!


बहुत सुन्दर भाई.


"मगर सीखा दे मुझे ये हुनर भी " में "मगर " शब्द कुछ अटपटा लगा ! शायद इससे अर्थ के प्रवाह में कुछ बाधा पड़ रही है ...(या हो सकता है मुझे ही लग रहा हो!)


@ आर्जव, मगर शब्द के दो अर्थ होते हैं लेकिन और शायद, यहाँ लेकिन प्रयुक्त हुआ है!

नोट: एक और भी होता है, मगरमच्छ! ;)


wah kya gazal hi......hindi mein padhke jee khush ho gaya!!


अरूणा जी बहुत-बहुत धन्यवाद!


विनय जी बहुत दिनों बाद आने के लिए माफ़ी चाहता हूं। मगर जब भी आपको पढ़ता हूं तो कहीं गुम सा हो जाता हूं। बस यही कहूंगा।


@विजय साहब मुआफ़ी माँगकर शर्मिंदा न करें, बस जब समय मिले पढ़ते रहिए, आपके प्यार और स्नेह की वर्षा किसी न किसी रूप में बनी रहे, बस इतनी दुआ है!


meri jaan bhi le...............khabar bhi

bahut umda gazal. badhai.


bahut hi sunder gazal hai bdhai


आप सभी का सहृदय धन्यवाद!



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