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times readकभी तेरी यादों को बिखराया कभी सहेजा
बयाँ दास्ताने-सोज़े-फ़ुगाँ2 किससे करूँ
सभी मेरे लफ़्ज़ देखते हैं न कि लहजा
सुकूनो-क़रारो-सबात3 से क्या मुझे
तू इस दिल के सौदे में मेरा सब कुछ ले जा
सदाए-राहे-मुहब्बत4 बुलाती है मुझको
दिमाग़ कुछ सोच के कहता है ठहर जा
गर्मिए-हौसलए-जुनूँ5 का असर है यह
दिल करता है मुझपे नवाज़िशहाए-बेजा6
अब तक न मेरे सलाम का कोई जवाब आया
तूने मुझको कोई ख़त भेजा कि न भेजा
ख़्याले-सुम्बुल7 से बीमार की बेक़रारी है
ऐ तबीब8 ‘नज़र’ को इसका इलाज दे जा
शब्दार्थ:
1. दर्द की आग; 2. टीस की जलन की कहानी; 3. सुकून, चैन और आराम; 4. मुहब्बत की राह की पुकार; 5. जुनून के हौसले की गर्मी(ताक़त, जोश); 6. बेकार का दिखावा; 7. सुम्बुल(प्रेयसी) की याद; 8. चिकित्सक



















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तख़लीक़-ए-नज़र | गुलाबी कोंपलें