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चाँद, बादल और शाम
तख़लीक़-ए-नज़र

इल्तिहाबे-दर्द से जलता है कलेजा

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इल्तिहाबे-दर्द1 से जलता है कलेजा
कभी तेरी यादों को बिखराया कभी सहेजा

बयाँ दास्ताने-सोज़े-फ़ुगाँ2 किससे करूँ
सभी मेरे लफ़्ज़ देखते हैं न कि लहजा

सुकूनो-क़रारो-सबात3 से क्या मुझे
तू इस दिल के सौदे में मेरा सब कुछ ले जा

सदाए-राहे-मुहब्बत4 बुलाती है मुझको
दिमाग़ कुछ सोच के कहता है ठहर जा

गर्मिए-हौसलए-जुनूँ5 का असर है यह
दिल करता है मुझपे नवाज़िशहाए-बेजा6

अब तक न मेरे सलाम का कोई जवाब आया
तूने मुझको कोई ख़त भेजा कि न भेजा

ख़्याले-सुम्बुल7 से बीमार की बेक़रारी है
ऐ तबीब8 ‘नज़र’ को इसका इलाज दे जा

शब्दार्थ:
1. दर्द की आग; 2. टीस की जलन की कहानी; 3. सुकून, चैन और आराम; 4. मुहब्बत की राह की पुकार; 5. जुनून के हौसले की गर्मी(ताक़त, जोश); 6. बेकार का दिखावा; 7. सुम्बुल(प्रेयसी) की याद; 8. चिकित्सक
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'मेरी ग़ज़ल' के बारे में आपका क्या ख़्याल है?

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तख़लीक़-ए-नज़र | गुलाबी कोंपलें

23 टिप्पणियाँ

मोहब्बत की बेकरारी और तड़पते जज्बात से लबरेज ग़ज़ल.......

Regards


Nirala andaz-e-bayan hai aapka, mushkil radeef ko kamyabi se nibhaya hai


बड़ी मंहगी गजल लिख गये जनाब..एक एक शब्द नायाब!!


खूबसूरत है ग़ज़ल विनय जी
ये शेर ख़ास कर पसंद आया

अबतक न मेरे सलाम का कोई जवाब आया
तूने मुझको कोई ख़त भेजा की न भेजा


बेहतरीन रचना विनय जी.
शुक्रिया


विनय भाई बहुत ही बेहरतीन गजल ,गजल का हर शॆर लाजबाव.
धन्यवाद


आपकी गज़लें तो है ही तारीफ़ के काबिल, आपके ब्लोग्स की साजो-सज्जा देख के भी मन बहुत खुश हो जाता है.....


आज 10 दिन बाद नेट पर आई हू सब से पहले आपकी मेल पडी आप बहुत बडिया लिखते हैं गज़ल पढते हुये मन मे खयाल आया कि क्यों ना आपसे ही उर्दू सीखा जाये मैने आपकी गज़लों के नीचे श्ब्द अर्थ नोट् करने शुरु कर दिये हशायद आप जैसी गज़ल तो ना बना पाऊँ मगर लिखने के लिये आप्के सहयोग की जरूरत रहेगी
ख्याल सुम्बुल् से बीमार की बेकरारी है
ऎ तबीब नज़र को इसका इलाज़ दे जा
बहुत हि खूबसूरत दिल छूने वाला शेअर है बधाई


Bahut ache..... Nazar G... Sabhi aashar umda hai.....


bahut khubsoorat rachana hai.thaks alot


SADAYE RAAHE-MUHABBAT BULAATEE MUJHKO
DIMAAG KUCHH KAHTA HAI THAHAR JA...
VINAYJI, SACHMUCH YE PANKTIYAAN "HOSHOHAWAS" KEE BAATEN KARTEE HAIN. AAPKE GAZAL KE IS GULDASTE KO DHER SAAREE SHUKRIYA!!!


... mixed feeling!
Achchi hai, lay mein gadbad hai ...


Matlaa bahut achcha hai. Badhai!


वाह -वाह , वाह -वाह विनय जी बहुत खूब .आपकी गज़लें पढ़kar तो हम सोच रहे हैं के हम लिखें के न लिखें .
आपको भी इस रंगीले होली के त्योहार पर शुभकामनायें


आप सभी का हार्दिक धन्यवाद और होली की शुभकामनाएँ!


विनय की शायरी में, लब्ज सब कुछ बोल देते हैं।
विरह की आग में जल कर, कलेजा खोल देते हैं।


आप सभी की आत्मीय टिप्पणियों के लिए सच्चे दिल से आभार व्यक्त करता हूँ, नयी रचना लेकर शीघ्र ही प्रस्तुत हूँगा!

@ comman man साहब, सोच तो तो मैं भी रहा हूँ पर प्रयास करने के लिए पर्याप्त स्रोत नहीं हैं।


dard aur sukun ka behtareen samanjasya......



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