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times readक्यों नहीं हो तुम बेक़रार
तुमने मुझसे बात नहीं की
जला गयी मुझे आहे-शोलाबार
शामे-ग़म मुझे दर्द थे
और तुम आये गोया बहार
पैराहन भीग जाता है लहू से
यूँ बहते हैं दीदाए-फ़िगार
देखना' न छूना मेरे ज़ख़्म
जला न दे तुझे यह शरार
दाइम मशगूले-हक़ हूँ मैं
फिर भी आश्ना है अग़ियार
कोई हसरत से देखे मुझे
मैं उसे बना लूँ अपना प्यार
तुमसे दोस्ती का बहाना मिले
बन जाओ मेरे ग़मख़्वार
ख़ाब में लम्स था सुम्बुल का
वो क्या लम्हा था यादगार
'नज़र' को न भाये कुछ अगर
तो दिल में हो तुम बरक़रार
शब्दार्थ:
ख़स्ताहाल: abandon, बीमार: ill, बेक़रार: curious, आह: ah!, woe, शोला: fire, spark, गोया: like that, पैराहन: cloth, लहू: blood, दीदा: eyes, फ़िगार: afflicted, sore, ज़ख़्म: scar, wound, शरार: fire, spark, दाइम: always, मशगूल: busy, हक़: truth, आश्ना: friend, अग़ियार: enemy, ग़मख़्वार: who share sorrow, लम्स: touch, सुम्बुल: hyacinth, lover



















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तख़लीक़-ए-नज़र | गुलाबी कोंपलें