Loading...

चाँद, बादल और शाम
तख़लीक़-ए-नज़र

ख़ाब में लम्स था सुम्बुल का

()

times read
ख़स्ताहाल है जो तेरा बीमार
क्यों नहीं हो तुम बेक़रार

तुमने मुझसे बात नहीं की
जला गयी मुझे आहे-शोलाबार

शामे-ग़म मुझे दर्द थे
और तुम आये गोया बहार

पैराहन भीग जाता है लहू से
यूँ बहते हैं दीदाए-फ़िगार

देखना' न छूना मेरे ज़ख़्म
जला न दे तुझे यह शरार

दाइम मशगूले-हक़ हूँ मैं
फिर भी आश्ना है अग़ियार

कोई हसरत से देखे मुझे
मैं उसे बना लूँ अपना प्यार

तुमसे दोस्ती का बहाना मिले
बन जाओ मेरे ग़मख़्वार

ख़ाब में लम्स था सुम्बुल का
वो क्या लम्हा था यादगार

'नज़र' को न भाये कुछ अगर
तो दिल में हो तुम बरक़रार

शब्दार्थ:

ख़स्ताहाल: abandon, बीमार: ill, बेक़रार: curious, आह: ah!, woe, शोला: fire, spark, गोया: like that, पैराहन: cloth, लहू: blood, दीदा: eyes, फ़िगार: afflicted, sore, ज़ख़्म: scar, wound, शरार: fire, spark, दाइम: always, मशगूल: busy, हक़: truth, आश्ना: friend, अग़ियार: enemy, ग़मख़्वार: who share sorrow, लम्स: touch, सुम्बुल: hyacinth, lover
Previous Page Next Page Home

'मेरी ग़ज़ल' के बारे में आपका क्या ख़्याल है?

आपका चिट्ठे पर पधारने एवं प्रतिक्रिया करने के लिए सच्चे मन से धन्यवाद!
मेरी अन्य विधाएँ पढ़ने के लिए इन पृष्ठों को भी देखें।
तख़लीक़-ए-नज़र | गुलाबी कोंपलें

20 टिप्पणियाँ

बहुत अच्छे... नज़र जी.


बहुत खूब!!सुन्‍दर विनय जी
शुक्रिया


छोटी बहर में लिखी अच्छी ग़ज़ल
बहुत खूब


बहुत ही सुंदर पूछा है बीमार का हाल.
धन्यवाद


vinaya ji,
achchhee rachna..badhiya shabd.


वाह विनय भाई.....
बहुत सुंदर


वाह.. विनय जी वाह.... अच्छी कही....


chaliye ghazal ke saath shabdaarth bhi bataa dete hain warna ham jaiso ko to kuch samajh nahi aayega :)
umda likhte hain, zaari rakhiye..


कठिन उर्दू शब्दों को समझने में थोड़ी कठिनाई हुई पर ग़ज़ल बेजोड़ है


अरे वाह, आपने तो शब्दों के अर्थ भी दे रखे हैं
मैंने ध्यान नहीं दिया था. दुबारा पढा
बेहतरीन !!!!!!!!!


सपनों में आते हो, दिल में भी समा जाओ।
दीदार का प्यासा हूँ, मुखड़ा तो दिखा जाओ।।


behad hi khoobsurat aur dil ko choo lene wali ghazal.


koi hasrat se dekhe mujhe ...
or
koi harsrat se mujhe dekhe ..

Which one sounds better?


If it is the Poet's hasrat that someone should see him with Hasrat, then what you have written is correct. If Poet wants to say someone is looking at him with hasrat, then I think the second line sounds better.

If its former, you can add 'bhi' to indicate its your hasrat.

Poet is the father, knows his Poem best! Decision is yours!

- RC (sorry I was logged in my gmail account so putting this as anonymous)


एक बार पढ़कर आनन्द नहीं आता (पूरा), बार-बार पढ़ने का मन करता है.


देखना न छूना मेरे जख्म, जला न दे तुझे ये शरार ।
बहुत सुंदर ।


आप सभी की टिप्पणियों के लिए आपको दिल से धन्यवाद देता हूँ, अपना स्नेह यूँ ही बनाये रखिए!

@RC जी आपको ई-मेल तो लिख ही दिया है आगे भी आपके अमूल्य विचारों का स्वागत है!



Feed Me!

प्रविष्टि सूचना/News Subscription


कुछ उपयोगी/Best Links


Alexa & Google Rank

आवागमन/Traffic & Stats


दिल कोई जा और भी है/Else where I am...

Wordpress Tumblr DeviantArt Technorati MySpace Pownce Twitter StumbleUpon Vimeo FriendFeed Mixx Digg Digg

आपके धड़कते दिल की सदा.../Your Views...

दिल से दिल तक राह/Friends & Fans


TECH PREVUE